Pathak's funda
"तकिये को भींगो रखा था नयन नीर से, अपने आँसू छुपा रखा था जमाने की भीड़ से ।"
Saturday, 27 September 2014
तू मेरी साँसे छीन सकते हो ,
क्योंकि इसपे मुझे एतबार नहीं,
छीन सको तो मेरी उडान छीनके दिखा,
क्योंकि मैं पर के सहारे नहीं उड़ता,
मैंने उड़ना नाकामी से लड़कर हौसलों से है सीखा ..
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